लंग्स कैंसर के लक्षण, कारण, बचाव एवं इलाज के विकल्प

लंग्स कैंसर के लक्षण, कारण, बचाव एवं इलाज के विकल्प

Medically reviewed by Dr. Belal Bin Asaf · Last updated: July 1, 2024

लंग्स कैंसर, जिसे फेफड़ों का कैंसर भी कहा जाता है, फेफड़ों के ऊतकों में शुरू होने वाला एक गंभीर रोग है, जिसमें फेफड़ों की कोशिकाएं अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का निर्माण करती हैं। यह ट्यूमर फेफड़ों के सामान्य कार्य में बाधा डाल सकता है और शरीर के अन्य भागों में भी फैल सकता है। लंग्स कैंसर के दो प्रमुख प्रकार होते हैं: स्मॉल सेल लंग्स कैंसर (SCLC) और नॉन-स्मॉल सेल लंग्स कैंसर (NSCLC)। लंग्स कैंसर के बारे में जागरूकता का महत्व इसलिए है क्योंकि यह बीमारी के शुरुआती लक्षणों की पहचान, धूम्रपान छोड़ने, वायु प्रदूषण से बचने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के माध्यम से इसकी रोकथाम में मदद कर सकता है। जागरूकता से प्रभावित लोगों को सही जानकारी और समर्थन मिल सकता है, और इससे लंग्स कैंसर पर अधिक शोध और नए उपचार विधियों के विकास के लिए भी प्रोत्साहन मिलता है।

प्रारंभिक लक्षण

लंग्स कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • खांसी: लगातार खांसी रहना या नई खांसी का उत्पन्न होना, जो समय के साथ ठीक नहीं होती।
  • खांसी में खून आना: खांसते समय खून आना या खून मिश्रित कफ निकलना, जो फेफड़ों में गहरे रोग का संकेत हो सकता है।
  • सांस की समस्या: सांस लेने में कठिनाई होना या श्वास की कमी महसूस होना, विशेषकर सामान्य शारीरिक गतिविधियों के दौरान।
  • सीने में दर्द: गहरी सांस लेने, खांसने या हंसने पर सीने में दर्द होना, जो फेफड़ों में ट्यूमर के विकास का संकेत हो सकता है।

ये प्रारंभिक लक्षण आमतौर पर अन्य सामान्य समस्याओं के लक्षणों के समान होते हैं, इसलिए इन लक्षणों के दिखाई देने पर डॉक्टर से परामर्श करना महत्वपूर्ण है।

उन्नत लक्षण

लंग्स कैंसर के उन्नत लक्षणों में निम्नलिखित शामिल हैं:


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  • आवाज़ में बदलाव: आवाज का भारी होना या बदल जाना, जो श्वास नलिका में ट्यूमर के दबाव के कारण हो सकता है।
  • वजन में कमी: बिना किसी प्रयास के या बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन का कम होना, जो कैंसर की प्रगति का संकेत हो सकता है।
  • हड्डियों में दर्द: पीठ, कूल्हों या शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द होना, जो हड्डियों में कैंसर के फैलने का संकेत दे सकता है।
  • सिरदर्द: लगातार सिरदर्द रहना, जो कैंसर के मस्तिष्क में फैलने का संकेत हो सकता है।

ये उन्नत लक्षण लंग्स कैंसर की गंभीरता और इसके शरीर के अन्य हिस्सों में फैलने का संकेत देते हैं। इन लक्षणों के दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा परामर्श लेना आवश्यक है।

लक्षणों का कारण

लंग्स कैंसर के लक्षणों के विभिन्न कारण हो सकते हैं, जिनमें मुख्यतः निम्नलिखित शामिल हैं:

  • धूम्रपान: धूम्रपान और तंबाकू का सेवन लंग्स कैंसर का सबसे प्रमुख कारण है। सिगरेट, सिगार, और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन फेफड़ों में कैंसर कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा देता है।
  • वायु प्रदूषण: प्रदूषित हवा में लंबे समय तक रहना भी लंग्स कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। वायु में मौजूद हानिकारक रसायन और धूल कण फेफड़ों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • पारिवारिक इतिहास: यदि परिवार में किसी को लंग्स कैंसर हुआ है, तो इससे संबंधित व्यक्ति के लंग्स कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।
  • रेडॉन गैस: रेडॉन गैस एक प्राकृतिक रेडियोधर्मी गैस है जो मिट्टी और चट्टानों से निकलती है। इसके संपर्क में आना लंग्स कैंसर के विकास का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है।
  • एस्बेस्टस: एस्बेस्टस एक खनिज रेशा है जिसका उपयोग विभिन्न उद्योगों में किया जाता है। इसके संपर्क में आने से फेफड़ों में सूजन और कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।

इन कारणों से बचने और इनसे संबंधित जोखिम को कम करने के लिए सावधानी बरतना महत्वपूर्ण है।

निदान की प्रक्रिया

लंग्स कैंसर का निदान करने की प्रक्रिया में निम्नलिखित जांचें शामिल होती हैं:

  • शारीरिक जांच: डॉक्टर द्वारा शारीरिक जांच की जाती है जिसमें रोगी के शारीरिक स्थिति का मूल्यांकन होता है।
  • छाती का एक्स-रे: छाती के एक्स-रे से फेफड़ों की स्थिति का विशेष ध्यान रखा जाता है और इससे कैंसर के संकेतों का पता लगाया जाता है।
  • सीटी स्कैन: फेफड़ों की विस्तृत छवि प्राप्त करने के लिए सीटी स्कैन की जाती है, जो अधिक सूक्ष्म रूप से कैंसर के विकास को दिखा सकता है।
  • बायोप्सी: कैंसर की पुष्टि के लिए डॉक्टर द्वारा ऊतक का नमूना लिया जाता है। यह नमूना लैब में जांचा जाता है ताकि कैंसर की श्रेणी और उसकी स्थिति का सही निदान किया जा सके।

ये जांचें एक संयुक्त दृष्टिकोण से इस बीमारी को पहचानने में मदद करती हैं और उचित इलाज योजना तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

इलाज के विकल्प

लंग्स कैंसर के इलाज के विभिन्न विकल्प शामिल हो सकते हैं:

  • सर्जरी: कैंसरग्रस्त ऊतक को हटाने के लिए सर्जरी का उपयोग किया जाता है।
  • कीमोथेरपी: कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए दवाओं का उपयोग किया जाता है, जो पूरे शरीर में फैलते हैं।
  • रेडियोथेरपी: कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए विकिरण का उपयोग किया जाता है।
  • इम्यूनोथेरपी: शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने के लिए इम्यूनोथेरपी का उपयोग किया जाता है, जिससे शरीर को कैंसर से लड़ने में मदद मिलती है।

इन विकल्पों का चयन रोगी के लंग्स कैंसर के स्थिति और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है, और डॉक्टर द्वारा सलाह दी जाती है।

बचाव और रोकथाम

लंग्स कैंसर से बचाव और रोकथाम के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा सकते हैं:

  • धूम्रपान छोड़ना: धूम्रपान और तंबाकू से दूर रहना लंग्स कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
  • स्वस्थ आहार: पौष्टिक और संतुलित आहार लेना, जो शरीर को मजबूत बनाने और कैंसर से लड़ने में सहायक हो सकता है।
  • व्यायाम: नियमित व्यायाम और शारीरिक सक्रियता से स्वस्थ रहना, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद कर सकता है।
  • वायु गुणवत्ता: अच्छी वायु गुणवत्ता बनाए रखना, जिससे प्रदूषित वायु के कारण कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है।
  • रेडॉन जांच: घर में रेडॉन स्तर की नियमित जांच करना, जिससे वायु में विशेष रेडियोधर्मी गैस के जोखिम को पहचाना जा सके।

ये सभी कदम स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में मदद करते हैं और लंग्स कैंसर के जोखिम को कम करने में सहायक हो सकते हैं।

निष्कर्ष

लंबी बात की अंतिम राय यह है कि लंग्स कैंसर से बचाव और संभावित रोकथाम के लिए समय-समय पर जांच, धूम्रपान और तंबाकू का छोड़ना, स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम, अच्छी वायु गुणवत्ता का ध्यान रखना और घर में रेडॉन स्तर की जांच महत्वपूर्ण है। इन उपायों को अपनाकर हम अपने शारीरिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रख सकते हैं और लंग्स कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बच सकते हैं।

Dr. Belal Bin Asaf is a Thoracic, Thoracoscopic & Robotic Surgeon and Director of the Institute of Chest Surgery, Chest Onco-Surgery & Lung Transplantation at Medanta Superspecialty Hospital, Noida, and Medanta - The Medicity, Gurugram. He trained as a Clinical Registrar in General Thoracic Surgery at AIIMS, New Delhi, and completed a fellowship in Thoracic Surgery at Seoul National University Bundang Hospital, South Korea. He was the first surgeon in India to perform Robotic Subxiphoid Thymectomy for thymoma patients.